एलोपैथी और आयुर्वेद की खासियतों से दुनिया अच्छी तरह से वाकिफ है। इसी कड़ी में एक नाम होम्योपैथी का भी है। जर्मन मूल के ईसाई फ्रेडरिक सैमुअल हैनीमैन को होम्योपैथी का जनक कहा जाता है। यही कारण है कि हैनीमैन के जन्मदिन यानी 10 अप्रैल को विश्व होम्योपैथी दिवस के रूप में मनाया जाता है। होम्योपैथी को वैकल्पिक चिकित्सा के रूप में जाना जाता है। हालांकि अंग्रेजी दवाओं की तुलना में होम्योपैथी दवाओं का असर बहुत धीरे होता है, लेकिन यह रोगों को जड़ से दूर करने के लिए एक रामबाण तरीका साबित हो सकता है। होम्योपैथी दवाओं की खास बात यह है कि इसके कोई साइडइफेक्ट नहीं होते हैं। प्रैक्टो पर प्रकाशित एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने, कार्डियोवैस्कुलर बीमारी की रोकथाम करने और मैमोरी पॉवर बढ़ाने में अन्य दवाओं की अपेक्षा होम्योपैथी की दवाएं काफी कारगर साबित होती हैं। जानकारों की माने तो शुरुआत से ही अंग्रेजी दवाओं की बजाए होम्योपैथी की आदत लगाने वाले लोग माइग्रेन जैसी परेशानियों से दूर रहते हैं। गठिया जैसी बीमारी को यह 82 फीसदी तक कम करता है। वहीं होम्योपैथी की दवाएं नींद से जुड़ी समस्याओं को भी 60 फीसदी कम करता है। दरअसल होम्योपैथी की सभी दवाएं दिखने में एक जैसी लगती है, लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य हो सकता है कि दुनिया में चार हजार से भी ज्यादा तरह की होम्योपैथी की दवाएं मौजूद हैं। हालांकि यह कहना भी गलत होगा कि होम्योपैथी के पास हर मर्ज की दवा है। कुछ बिमारियां ऐसी भी हैं जिनका इलाज होम्योपैथी में संभव नहीं है। मसलन अगर शरीर में किसी विटामिन की कमी हो जाए तो होम्योपैथी में उनके लिए ज्यादा विकल्प नहीं हैं। इसके अलावा होम्योपैथी की दवाओं का असर हर व्यक्ति पर अलग-अलग होता है। होम्योपैथी में डाइट कंट्रोल की तो बहुत जरूरत नहीं होती, लेकिन इनका सेवन करते हुए लहसुन, अदरक, कच्चा प्याज जैसी कई चीजें खाने की मनाही होती है।